By: Roshan Choudhary | June 20, 2016

मिथिला राज्यक निर्माण लेल विभिन्न तरहे आन्दोलन भ' रहल अछि। जेना धरना प्रदर्शन, सोशल साईट सँ ल' क' मिथिलामें  रथ यात्रा निकलि क' लोगके जागरूक केनाई, कोनो ठाम सेमीनार क' क' , कोनो ठाम ज्ञापन द' क', कोनो ठाम अनशन कए क' मिथिला राज्यक मांग भ' रहल अछि। मिथिला  राज्यक मांग भारतके  अजादी'क समय सँ भ' रहल  अछि अर्थात मिथिला राज्यक मांग बहुत पुरान अछि, सरकार सुतल अछि लेकिन मिथिला लोक (मैथिलि-मिथिलानी) मिथिला राज्य लेल हिंसाक रस्ता नञिं अपनेलक। 

              मैथिल-मिथिलनी अलगाववादी नञिं भ' सकए छथि। बिना कोनो हिंसाक सहारा लेने शांतिपूर्ण संवेधानिक तरीका सँ मिथिला राज्यक मांग केनाई कोनो तरहक अलगाववादी निशानी नञिं छै। मैथिल-मिथिलानी दू देश (भारत-नेपाल) में बाँटल गेला ओहो बातके स्वीकार क' लेने छथि। सीमा पर रहए बाला समुदाय एतेक सहिष्णु छथि जे दू देशमें रहितौ अपन अपन देशके सर्वोपरी बुझैत छथि

               बिहार राज्यमें मैथिल-मिथिलानीके जीवन लेल जे न्यूनतम आवश्यकता होयत छै सेहो नञि भेंट रहल छै। भारतमें जतेक राज्य अछि एतय तक भारतके केंद्र सरकार अपन अपन भाषा बचेवाक लेल, संवर्धन लेल पैघ स्तर पर काज करैत रहैत अछि। मुदा बिहार सरकार बहुसंख्यक भाषा मैथिलीके भारतके आजादीके 70  साल बादो मान्यता तक नञि देने अछि। मिथिलामें सब साल बाढ़ि एबेटा क'रत, कोनो स्थायी निदान नञिं भेल। सब साल लाखो-करोड़ो के जान आओर माल दुनुक नोकसान होयत अछि, केंद्र सँ बाढ़ि पीड़ित लेल आर्थिक मदति भेटएत अछि ओकरो बंदरबांट भ' जायत अछि। सब ठाम शिक्षा मातृभाषामें भेटैछ मुदा बिहारमें कोर्ट'सँ आर्डर भेलाक बादो मातृभाषामें शिक्षाक लेल कोनो प्रयास नञिंं कएल जा रहल अछि। रोजगारक सब अवसर ख़तम क' देल गेल, कृषिक अवस्था दिनोन्दिन खराप भेल जा रहल अछि। मिथिलाक चीनी मिल, जुट मिल आओर पेपर मिल पर ताला लगा देल गेल अछि। पटना सँ सामन्तवादी व्यवस्थाक तहत सरकार चलि रहल अछि। परिणामतः मैथिल-मिथिलानी कत' जायत, मिथिलाक बड़ बेसी आबादी पलायन लेल मजबूर भ' गेल अछि। जतय एकमात्र उपाय मिथिला राज्य देखा रहल छै ओतय मैथिल चुप किएक रहत, हमरो बराबरीके अधिकार चाही, हमरो ओ सब सुख सुविधा चाही, हमहू सब टैक्स सरकारके दएत छिये। हमर सभक मिथिला राज्यक मांग नञि कोनो अलगाववादक भावना सँ अछि आ नञिं बंटबाराक भावना सँ अछि, हमर सभक मिथिला राज्यक मांग बराबरीके अधिकारक भावनाक संग अछि मिथिला राज्यक निर्माणमें जतेक देरी भ' रहल अछि हम मैथिल-मिथिलानी ओतेक बेसी पाछू जा रहल छी, भारतक संसदके चाही जे अविलंव मिथिला राज्यक गठन क' क' मिथिलाके समुचित विकासमें सहयोग करए

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